सरिस्का में डेढ़ साल में मरे 4 बाघ, जिम्मेदार अफसर हुए प्रमोट, किसी पर नहीं हुई कार्रवाई

सरिस्का में डेढ़ साल में मरे 4 बाघ, जिम्मेदार अफसर हुए प्रमोट, किसी पर नहीं हुई कार्रवाई

2008 में बाघों के पुनर्वास से आबाद हुए सरिस्का में करीब चार साल पहले अच्छे दिन लौटने लगे। टूरिज्म तेजी से पनपा। बीते 2 साल में सरिस्का और आसपास करीब 20 नए और बड़े होटल खुल गए। ताज ग्रुप जैसे कई बड़े होटल भी कतार में हैं। लेकिन बीते डेढ़ साल में अचानक सरिस्का पर जैसे ग्रहण लग गया है। लगातार बाघों की मौत के बाद अब सरिस्का फिर कठघरे में है। साल 2004 जैसा कलंक फिर क्यों लगा, यह जानने के लिए भास्कर ने पड़ताल की तो राजनेताओं से लेकर वन अधिकारियों, रणथंभौर होटल लॉबी और स्टाफ तक, सब कठघरे में नजर आ रहे हैं। मार्च 2019 में बाघों लगातार मौतों पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार से जवाब तलब भी किया। इसके बावजूद अधिकारी गंभीर नहीं हुए।

रोटक्याला ठंडा जंगल, फिर हीट स्ट्रोक कैसे : बाघ एसटी-16 की मौत की वजह वन अधिकारी तेज गर्मी व ट्रोमेटिक अटैक बता रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि रोटक्याला एरिया सरिस्का के सबसे सघन जंगल है। जहां भरपूर पानी और कम तापमान रहता है।

ट्यूमर की सूचना 13 दिन पहले मिली, इलाज में देरी क्यों : बाघ एसटी-16 के पैर में गांठ होने की अधिकृत सूचना वन अधिकारियों को 28 जून को ही मिल गई थी। इसके बावजूद उसके इलाज में 13 दिन लगा दिए गए। रेंजर, डीएफओ सीधे जिम्मेदार थे।

बाघ के पैर में तकलीफ थी, तो कैमरे में ठीक कैसे दिखा : एक रात पहले बाघ कैमरे में बिल्कुल ठीक तरह से चलता दिखा था। जबकि वन अधिकारी कह रहे हैं कि उससे चला नहीं जा रहा था। सवाल ये है कि क्या ट्यूमर ठीक होने के बावजूद उसे ट्रंकुलाइज किया गया।

अलवर. सरिस्का में ट्रंकुलाइज करने के दौरान मरे बाघ एसटी-16 को लेकर जाते वनकर्मी।

जानिए 3 वजहें जो बाघों का काल बन रहीं

1. वन अधिकारियों का फोकस बाघों पर नहीं कमाई पर : सरिस्का में बीते 17 माह में 4 बाघ और 3 शावकों की मौत के बावजूद वन अधिकारियों का फोकस बाघों की सुरक्षा पर कम ईको डेवलपमेंट कमेटी, टाइगर प्रोजेक्ट और रिलोकेशन का बजट खपाने में ज्यादा रहा। बाघों के मूवमेंट, शिकारियों के दखल और बाघों की जरूरत और बीमारियों पर ध्यान नहीं देने से ये हालात बने- 2010, बाघ एसटी-1 को जहर देकर मारा गया। 2014, बाघ एसटी-6 की नाक पर ट्यूमर हुआ। 2017, दो बार एसटी-6 के शिकार पर जहरीला पाउडर मिला, बचा 2017, बाघिन एसटी-9 की पूंछ पर जख्म हुआ, इसे काटना पड़ा। 2018, फरवरी में बाघिन एसटी-5 लापता, शिकार हुआ 2018, मार्च में बाघ एसटी-11 का फंदा लगाकर शिकार 2018, बाघ एसटी-6 जख्मी हुआ, सिर में कीड़े पड़े 2018, एसटी-4 जख्मी हुआ, दिसंबर में भूख से मौत 2019, अप्रेल में बाघिन एसटी-12 के 3 शावक लापता हो गए।

2. सात टाइगर मरे, किसी पर कार्रवाई नहीं
एसटी-5 शिकार: 3 गार्ड सस्पेंड, किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं। तत्कालीन हॉफ बोले सीएफ भी जिम्मेदार हैं, लेकिन जब शिकार की पुष्टि हुई तो तत्कालीन डॉ जीएस भारद्वाज निगरानी के जिम्मेदार थे, इन्हें प्रमोट किया। निलंबित स्टाफ भी बहाल।
एसटी-11 शिकार: बाघ एसटी 11 के शिकार मामले में बीट गार्ड को नोटिस। बहाल। रेंजर, डीएफओ और सीएफ पर कोई कार्रवाई नहीं। उल्टे प्रमोट हो गए। रेंजर धर्मपाल चौधरी ने 90 दिन में कोर्ट में आरोपियों पर चालान तक पेश नहीं किया। कोई कार्रवाई नहीं, इन्हें हाल ही गृह जिले में लगाया गया है।

एसटी-4 मौत: कोई दोषी नहीं, किसी को निलंबित तक नहीं किया गया।
तीन शावकों की मौत: किसी भी स्तर के कर्मचारी या अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं।

सरकारी बंदूक से शिकार: बिना सबूत रेंजर बरी
सरिस्का में तैनात एक रेंजर जितेंद्र चौधरी को तो सरकारी बंदूक को अवैध रूप से रखने व तीन कारतूस चलाने, फर्जी हस्ताक्षर से गलत रिपोर्ट बना सरकार को धोखा देने, 1.30 लाख रुपए के ईडीसी गबन में रिकवरी के मामलों में हाल ही बरी कर दिया गया। शिकारियों के रिश्तेदार को सरकारी वाहन देने व महिला सहकर्मी से उत्पीड़न की जांच पेंडिंग है।

3. सरकार सरिस्का को कर रही नजरअंदाज : प्रदेश सरकार भी सरिस्का में बाघों की दुर्गति की जिम्मेदार है। स्टाफ से लेकर बजट तक हर स्तर पर कमियां हैं। राजनीतिक दबाव में विस्थापन 8 साल से अटका रखा है।

रणथंभौरVsसरिस्का
रणथंभौर के 1734 वर्ग किमी. में 69 बाघ। बजट : प्रोजेक्ट टाइगर 6.45 करोड़+33.5 करोड़ आरटीएफ+14.5 करोड़ (5 साल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से) स्टाफ : डीएफओ- 3 पद, सभी भरे, एसीएफ-5 पद, 2 खाली, रेंजर व अधीनस्थ-135 पद, 36 खाली।

सरिस्का के 1202 वर्ग किमी. में 16 बाघ। बजट : प्रोजेक्ट टाइगर 7.12 करोड़+ 5.9 करोड़ एसटीएफ। स्टाफ : डीएफओ-2 पद, एक रिक्त, एसीएफ-9 पद, 4 खाली, रेंजर व अधीनस्थ-173 पद, 76 खाली

अलवर ब्यूरो

अलवर ब्यूरो
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