किसान आंदोलन: कृषि कानूनों के खिलाफ क्यों अड़े हैं किसान, जानिए पूरा मामला

किसान आंदोलन: कृषि कानूनों के खिलाफ क्यों अड़े हैं किसान, जानिए पूरा मामला

करीब 22 दिन से किसान इतनी सर्दी में सरकार के द्वारा बनाए गए 3 कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों से किसान एकजुट होकर दिल्ली की सीमा पर डटकर आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया था जिसमें करीब 2 दर्जन विपक्षी राजनीतिक पार्टियों और विभिन्न किसान संगठनों ने समर्थन किया था। इस आंदोलन में किसान नेताओं और सरकार की कई राउंड की बातचीत हो चुकी लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। दिल्ली बॉर्डर और राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर करीब 1 लाख किसान अपना ठिकाना बनाकर बैठे हुए हैं। किसान इन तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार की तरफ से लगातार बताया जा रहा है कि नए कानून से किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा।

किसान क्यों कर रहे हैं आंदोलन

20 और 22 सिंतबर को संसद में कृषि संबंधी तीन विधेयक पारित किए गए। 27 सिंतबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा इन विधेयक को मंजूरी दे दी गई। जिसके बाद ये तीनों विधेयक कानून बन गए। इन कानून के प्रवाधानों को लेकर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन कानूनों के द्वारा किसान APMC (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी) मंडियों के साथ निजी कंपनियों के साथ कॉन्ट्रेक्ट खेती, खाद्यान्नों का भंडारण और बिक्री कर सकते है।

किसानों को इस बात का डर है कि सरकार फसलों की खरीद को निजी हाथों में सौंपकर APMC को खत्म करना चाहती है। निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने से मंडियों में फसल नहीं जाएगी। किसान बाहर ही अपनी फसल बेच देंगे और कुछ समय बाद APMC मंडिया बंद हो सकती है, जिसके बाद बाजार पूरी तरह कॉरपोरेट के हाथों में चला जाएगा। इस बीच किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाले कानून की भी मांग कर रहे है।

हालांकि तीनों नए कानूनों में APMC मंडियों के बंद करने या MSP को खत्म करने की बात शामिल नहीं है लेकिन किसानों को डर यह है कि इन कानूनों के जरिए निजी कंपनियों के इस बाजार में आने से अंत में यही होना है। इसी आशंका के चलते ही पंजाब के किसानों ने इन कानूनों के विरोध में जून-जुलाई से ही प्रदर्शन शुरू कर दिया था। हरियाणा के किसान विरोध प्रदर्शन में सितंबर में शामिल हुए। राजस्थान के किसान दिसंबर से इस प्रदर्शन में जुड़ गए हैं। अब इन कानूनों का राजनीतिक विरोध भी होने लगा है।

तीन नए कृषि कानून क्या हैं?

1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन व सरलीकरण) कानून-2020

2. कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून-2020

3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून-2020

पहले कानून की मदद से किसान अपनी फसल APMC मंडी के बाहर भी खुले बाजार में बेच सकते हैं। किसान इसी मुद्दे पर ज्यादा विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कुछ समय तक तो फसल अच्छे दामों में बिक जाएगी। लेकिन बाद में APMC की तरह एक निश्चित दर पर भुगतान की कोई गांरटी नहीं होगी। किसानों को इस बात की आशंका भी है कि इन कानूनों के रहते हुए उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाएगा। सरकार का कहना है कि इन कानूनों के कारण APMC मंडियां और MSP पर कोई बदलाव नहीं होगा।

दूसरे कानून के तहत कॉन्ट्रेक्ट खेती को मंजूरी दी गई है। यानी किसान थोक विक्रेताओं, प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज और प्राइवेट कंपनी से सीधे कॉन्ट्रैक्ट कर अपनी फसल का उत्पादन कर सकते हैं। साथ ही फसल बोने से पहले अपनी फसल का दाम तय कर अनुबंध कर सकते हैं। सरकार का दावा है कि इस प्रावधान से किसानों को पूरा मुनाफा होगा, बिचौलियों को कोई हिस्सा नहीं देना होगा। किसान को इस कानून से चिंता है कि वह अपनी फसल का खुद मोलभाव तय नहीं कर पाएगा। और दूसरी चिंता यह कि निजी कंपनियां गुणवत्ता के आधार पर उनके फसल की कीमत कम कर सकती हैं या फसल की खरीद भी बंद कर सकती है।

तीसरे कानून में सरकार ने दलहन, तिलहन, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया है। अब इनके भंडारण पर कोई रोक नहीं है। सरकार का कहना है कि इससे निजी निवेश आएगा और कीमतें स्थिर रहेंगी। लेकिन किसानों को कहना है कि इस प्रावधान से निजी कंपनियों बड़े पैमाने पर उत्पादों का भंडारण करेगी। इससे बाजार प्रभावित होगा। और आपूर्ति बढ़ने से कीमत भी बढ़ेगी।

सरकार किसानों की बात कहां तक मानने को तैयार?

सरकार किसानों नेताओं से बात कर इस मसले का हल करने का प्रयास कर रही है। लेकिन किसानों का कहना है कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन तीनों कानूनों को निरस्त करे।  किसानों की एक मांग ये भी है कि सरकार MSP से कम खरीद को कानून के दायरे में लेकर आएं। इसके अलावा धान-गेहूं की फसल की सरकारी खरीद को सुनिश्चित करने की मांग भी कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने कई बार किसान नेताओं से तीनों कृषि कानूनों के बारे में बात की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार निजी कंपनियों को रेगुलेट करने की और फ्रेमवर्क लाने के तैयार है। साथ ही MSP जारी रखने और APMC मंडियों को मज़बूत करने के लिए लिखित आश्वासन भी देने को तैयार है। सरकार इस बात के लिए भी तैयार कि निजी कंपनियों और किसान के बीच में किसी विवाद का फैसला SDM के जरिए ना कराने को भी तैयार है। किसान अदालत भी जा सकते हैं। लेकिन किसान सरकार के इन संशोधन से संतुष्ट नहीं है वह इन तीनों बिलों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं।

LALIT YADAV

ललित यादव  'The Alwar News' के फाउंडर है। ऑनलाइन पत्रकारिता में काम करने का पांच वर्ष का अनुभव है। दिल्ली के कई मीडिया संस्थान में काम करने का अनुभव है।
Shares
error: Content is protected !!