अलवर में कोरोना के सरकारी आंकड़ें निकले फर्जी, मौतें और संक्रमित बताए कम

अलवर में कोरोना के सरकारी आंकड़ें निकले फर्जी, मौतें और संक्रमित बताए कम

अलवर (Alwar) जिले में कोरोना के पूरे आंकड़ें कितने सच बताए जा रहे थे इस पर बहुत लोगों को शक था और उनका यह शक बिल्कुल सही निकला। रविवार को अलवर भास्कर में छपी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ। कोरोना की बेकाबू लहर से अलवर भी अछूता नहीं रहा। जिले में खूब मौतें हुई और हजारों लोग कोरोना की चपेट में आए और हजारों ठीक हुए। लेकिन प्रशासन ने जो आंकड़ें आपको बताए वह बिल्कुल गलत निकले।

सरकारी आंकड़ों की पोल खुली

अलवर जिला प्रशासन ने कोरोना के जो आंकड़ें पेश किए उनकी पोल खुल चुकी है। चिकित्सा विभाग ने 13 महीने में जितनी मौते बताई उससे डेढ़ गुना से ज्यादा चिता तो बीते 24 दिनों में जल गई है। सरकारी आंकड़ों में कोरोना संक्रमितों की संख्या भी गलत बताई गई। कोरोना की इस दूसरी लहर में 37 दिनों में 23.22% कोरोना पॉजिटिव मिले हैं यानि हर 100 जांच में 23 लोगों पॉजिटिव मिले हैं। इस दौरान 1.19 लाख सैंपलों की जांच में 27679 कोरोना पॉजिटव मिले हैं लेकिन चिकित्सा विभाग की ओर से कुल 21980 पॉजिटिव ही बताए गए है। सरकारी आंकड़ों में कुल संक्रमितों की संख्या में 5699 मामलों की गड़बड़ मिली है।

गुरुवार को जिले में 1210 केस मिले लेकिन 910 केस बताए गए। इसी तरह शुक्रवार को 1166 नए केस मिले और 805 केस बताए गए। यह खुलासा जयपुर निदेशालय से मिली रिपोर्ट में हुआ।

सरकारी आंकड़ों में मिली गड़बड़

चिकित्सा विभाग ने मौतें के आंकड़ें छुपाने में भी कसर नहीं छोड़ी चिकित्सा विभाग की ओर से 13 महीने के कोरोनाकाल में 178 ही मौत बताई गई हैं, जबकि 14 अप्रैल से 6 मई तक 24 दिन में ही 305 से अधिक चिता जल गई हैं। सच यह है कि जिले में बीते 13 महीनों में 450 से ज्यादा मौते हो चुकी है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में कोरोना की पहली लहर में 78 मौतें और दूसरी लहर में 100 मौतें बताई गई है। लेकिन जिले में हकीकत यह है कि पहली लहर में 150 मौत और दूसरी लहर में 305 मौतें हुई है।

जिनकी मौत के बाद कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है उन्हें से मौत के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। जिनकी मौत के बाद रिपाोर्ट पॉजिटिव आई है, उन्हें यहां कोविड से मौत के रिकार्ड में दर्ज नहीं किया गया।

LALIT YADAV

ललित यादव  'The Alwar News' से जुड़े हैं। ऑनलाइन पत्रकारिता में काम करने का पांच वर्ष का अनुभव है। दिल्ली के कई मीडिया संस्थान में काम कर चुके हैं।
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