8 साल की उम्र में गंवा दिया था एक हाथ, अब मेडल लेकर आए देवेंद्र झाझडिया

8 साल की उम्र में गंवा दिया था एक हाथ, अब मेडल लेकर आए देवेंद्र झाझडिया

राजस्थान के देवेंद्र झाझड़िया ने टोक्यो पैरालिंपिक में जेवलिन थ्रो प्रतिस्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता है। देवेंद्र ने दुनियाभर में भारत का नाम रोशन कर दिया है। देवेंद्र भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने तीन बार ओलिंपिक में मेडल जीता है। इससे पहले देवेंद्र साल 2004 एथेंस ओलिंपिक में गोल्ड और 2016 रियो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

डीमोरलाइज देवेंद्र को पत्नी और कोच ने किया मोटिवेट
देवेंद्र झाझड़िया की पत्नी मंजू ने बताया कि पिछले 2 साल से देवेंद्र लगातार ओलिंपिक की तैयारी कर रहे थे, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से ओलिंपिक केंसिल होने की खबर ने देवेंद्र को डीमोरोलाइज कर दिया था। इसके बाद परिवार के सदस्यों और देवेंद्र के कोच ने उन्हें लगातार मोटिवेट किया। देवेंद्र फिर से ओलिंपिक की तैयारियों में जुट गए। वे पिछले 1 साल से सिर्फ एक बार घर आए थे। आखिरकार देवेंद्र मेडल लेकर ही घर लेकर आ गए।

मेडल लाने का किया था वादा
देवेंद्र की पत्नी मंजू ने बताया कि टोक्यो पैरालिंपिक जाने से पहले देवेंद्र ने उन्हें हैट्रिक बनाकर फिर से मेडल लाने का वादा किया था। हालांकि इस बार उनके मन में सिल्वर मेडल को लेकर हल्की सी टीस है, लेकिन मुझे लगता है देवेंद्र का सिल्वर ही मेरे लिए गोल्ड है। देश भी देवेंद्र की परफॉर्मेंस से खुश होगा।

सिलेंडर उठाकर की वर्जिश साइकिल ट्यूब से की स्ट्रेचिंग
देवेंद्र के भाई अरविंद ने बताया कि किसी भी खिलाड़ी के बीए तीसरी बार ओलिंपिक में मेडल लाना बड़ी बात होती है। देवेंद्र ने न सिर्फ परिवार बल्कि राजस्थान और भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत भी की है। कोरोना के बाद जब सब कुछ बंद हो गया था तो देवेंद्र को भी कुछ वक्त के लिए प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और गांव में जाकर तैयारी शुरू की। इसके लिए देवेंद्र ने कभी सिलेंडर को उठाकर वर्जिश की तो कभी स्ट्रेचिंग के लिए साइकिल की ट्यूब का सहारा लिया। उन्होंने मिनिमम इक्विपमेंट में मैक्सिमम प्रैक्टिस की और खुद को फिट रखा। इसका नतीजा है कि देवेंद्र ने फिर से मेडल जीता है।

मां बोलीं-फिर से मेडल जीतेगा बेटा
वहीं देवेंद्र की जीत पर उनकी मां भी काफी खुश है। उन्होंने कहा कि देवेंद्र ने न सिर्फ परिवार बल्कि राजस्थान का नाम दुनिया भर में रोशन किया है। ऐसे में मुझे लगता है कि अगले ओलिंपिक में भी देवेंद्र फिर से मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन करेगा।

करंट लगने से काटना पड़ा था हाथ
देवेंद्र झाझड़िया जब 8 साल के थे। तब वह अपने गांव में पेड़ पर चढ़ रहे थे। तभी हाई टेंशन लाइन की चपेट में आने से देवेंद्र के बाएं हाथ में दिक्कत हो गई। हाथ कोहनी से काटना पड़ा था। देवेंद्र ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया, लेकिन मां जीवनी देवी ने उन्हें मोटिवेट किया। देवेंद्र ने धीरे-धीरे पढ़ाई के साथ जेवलिन थ्रो खेलना शुरू किया, और अब तीन ओलिंपिक मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन चुके हैं।

LALIT YADAV

ललित यादव  'The Alwar News' से जुड़े हैं। ऑनलाइन पत्रकारिता में काम करने का पांच वर्ष का अनुभव है। दिल्ली के कई मीडिया संस्थान में काम कर चुके हैं।
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